Dear friends!, क्या आप सभी जानते हैं? कि ज़िंदगी को सफल - संपन्न बनाने का सबसे सरल और उत्तम उपाय है -शिक्षा अर्थात् पढ़ाई | यह बात कानपुर में मेरे रसायन विज्ञान के अध्यापक श्री मूलचंद जी ने कही | वे हम सभी छात्रों को सिखाते कि मेहनत तो सभी करते हैं | परन्तु जो smart work करता है , आगे बही बढ़ता है और जीवन में सहज ही सफलता हाँसिल कर लेता है | और वैसे भी कोई भी काम smart way में किया जाए तो सब कुछ सरल - सहज ही लगने लगता है ....
'smart work' कुछ और नहीं हमारी सोच और सूझ - बूझ के अनुसार सही उद्देश्य से किया गया कोई भी कार्य स्मार्ट वर्क बन जाता है | smart work करना तब सरल हो जाता है जब कोई व्यक्ति अपनी power, हुनर या passion को ध्यान में रखकर अपनी ताकतों के अनुसार, अपने जीवन का लक्ष्य तय करता है | तब लक्ष्य पाने के लिए किये गए सभी सदकर्म smart work की श्रेणी में आते हैं |
अब, जब आपने अपना लक्ष्य तय कर लिया तो अब उस पथ पर आगे बढ़ने के लिए पूरी journey की एक सफल - सहज योजना बना लीजिये | अब चूँकि प्रधान कार्य शिक्षा मतलब ज्ञानार्जन करना है तो पढ़ाई प्रभावपूर्ण बनाने के लिये हम आपको यहाँ बहुत ही कारगर सलाह प्रदान कर रहे हैं की आपको कैसे पढ़ना है ....
सबसे पहले आप अपने अध्ययन के समय को स्कूल के periods की तरह छोटे-छोटे rounds में बाँट लीजिये | प्रत्येक round कम से कम 25-30 minutes का होना चाहिए | हर एक round के बाद 10 - 5 minutes का refreshment break लीजिए | जो आपको फिर से तरोताजा कर देगा | फिर इसी प्रकार से अगले small round की पढ़ाई करें | और फिर break लें | इस break को लेने से पहले पूरे round की पढ़ाई को एक बार recall (स्मरण) जरूर कर लें | इस प्रकार से आप जीतना भी रोज पढ़ सकते हो , उतना खूब पढ़ो |
प्रति दिन का Minimum study time , जो आपके लक्ष्य के लिए आवश्यक है , उसकी गणना कर लीजिये | ये गणना आपके target के syllabus अनुसार सटीक होनी चाहिए |
अब, अपनी याद करने की क्षमता परखकर , target ( लक्ष्य ) की demand ( माँग ) के अनुसार ही , ये निश्चित कर लीजिये कि अपको प्रतिदिन कितने घंटे और किस - किस समय कितना पढ़ना है....|
अब , याद किया हुआ शीघ्रता से हमेशा के लिए learn हो जाए अर्थात् समझ आ जाये , इसके लिए - study topic(s) को कोई story ( कहानी ) की तरह बनाकर याद कीजिये | अब , उचित , याद रखने में सहज कहानी कैसे बनाएं ? read given tips no.4 ....
टॉपिक की कहानी आपको सहज ही याद हो जाएगी यदि कहानी को आपने अपनी surroundings (वातावरण) से जोड़ा दिया है | क्योंकि वातावरण की वस्तुएं हमें पहले ही याद होती हैं | यदि आप याद की हुयी चीजों से relate कर देंगे, अर्थात् याद हो चुकी चीजों से जोड़ दोगे तो एक chain सी बन जाती और साथ जुड़ी सारी बात याद आ जाती है | हमारे मस्तिष्क की कार्य प्रणाली ही इस प्रकार की है | मस्तिष्क परस्पर जुड़ी हुई घटनाओं से मिलकर बनी पूरी फिल्म तुरंत याद कर जाता है | यहाँ, किसी भी तथ्य के याद हो जाने में एक और प्रधान कारक, जिसकी बहुत महत्ता है वह है - एकाग्रता |....
इसीलिए पढ़ाई उस समय शुरू करें जब आपका मस्तिष्क शांत हो| अर्थात् जिस समय आपकी एकाग्रता सहज ही बनती हो | यदि ऐसा नहीं है तो ऐसा माहौल बना लें | जिससे की आपकी एकाग्रता भंग न हो |
और इस प्रकार , जीवन के सुख - दुःख में सामंजस्य (balance) बैठा कर जीवन की लक्ष्य की दौड़ ko संतुलित बनाते हुए आगे बढ़ते जाईये | आपकी मंजिल आपका रास्ता देख रही है.... |
So dear friends ! आज ही ये संकल्प लीजिये कि -
'' अपना सही मुकाम हाँसिल कर के ही चैन लोगे.... '' |
जय हिन्द - जय भारत | वन्दे मातरम् ||
-by sk. gangwar
from Bharat.
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जय हिन्द .... | वन्दे मातरम् ||
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